शनिवार, 30 मार्च 2013

डॉ. मन्तेना विशेष - आम पन्ना

सभी आरोग्य अभिलाषियों और डॉ मन्तेना सत्यनारायण राजु के अनुयायिओं को प्रणाम और डॉ. मन्तेना की रसोई के इस विशेष संस्करण में स्वागत है। अपने कार्य विधी में व्य्स्थता के कारण कई दिनों से मैनें इस ब्लॉग में कोइ अप्डेट नहीं की। कॊइ बात नही, आज मैं भारतीय ग्रीष्म ॠतु: की गर्मी को परास्त करने वाली एक वेशेष पेय रस (जूस) को अपके समक्ष ले अया हूं। डॉ मन्तेना की रसॊई में आज का विशेष हैं - ’आम पन्ना’ जो की उत्तर भारत का एक लोकप्रीय पेय रस है। माना जाता है की आम पन्ना सूर्य ग्रीष्म का प्रकोप और शरीर में पानी की कमी जैसी विपत्तियॊं से लडने में सार्धक हैं।

तैयारी का समय:-

आम पन्ना कोई भी सरलता से अपने घर में १०-१५ मिनट में बनासकता हैं।

आवश्यक वस्तुयें:-

१. कैरी (कच्चा आम) - १ बडा या मध्य्म आकार
२. शहद - १ कप
३. बारीक कटा हुआ पुदीना
४. बारीक कटा हुआ हरी धनिया
५. भुना हुआ जीरा - १/२ चम्मच

बनाने की विधी:

वास्तव में इसे दो प्रकार से बनाया जाता है और दोनो ही पद्धतियों में अपना एक अलग स्वाद और रुची होता है। दोनो पद्धतियों में इसे बनाने की सम्पूर्ण विधी केवल पहले चरण को छोड कर समान है। आप अपनी सुविधा और रुची के अनुसार इसे बना सकते हैं।

तैयारी का समय:-

आम पन्ना कोई भी सरलता से अपने घर में १०-१५ मिनट में बनासकता हैं।

आवश्यक वस्तुयें:-

१. कैरी (कच्चा आम) - १ बडा या मध्य्म आकार
२. शहद - १ कप
३. बारीक कटा हुआ पुदीना
४. बारीक कटा हुआ हरी धनिया
५. भुना हुआ जीरा - १/२ चम्मच

बनाने की विधी:

वास्तव में इसे दो प्रकार से बनाया जाता है और दोनो ही पद्धतियों में अपना एक अलग स्वाद और रुची होता है। दोनो पद्धतियों में इसे बनाने की सम्पूर्ण विधी केवल पहले चरण को छोड कर समान है। आप अपनी सुविधा और रुची के अनुसार इसे बना सकते हैं।

पद्धति १:-

चरण १: कैरी / कच्चा आम यहाँ एक मुख्य भूमिका निभाता है। कैरी को धोकर १० मिनट तक पानी में उबालिए या दो सीटी बजने तक उसे प्रेशर कूक कीजिए। फिर उसे कुच देर ठंडा होने दें और उसके पश्चात कैरी का छिल्का निकाल्कर उस्के गूदे को एक पात्र में लीजिए।

पद्धति २:-

   

चरण १: इस पद्धति में आम को चूले के बर्नर पर जलाइए। कैरी को चारों तरफ़ घुमाकर उस समय तक जलाइए जब तक उसका छिल्का काला न बनें। फिर उसे घरेलू तापमान में ठंडा कर छिल्का हठाइए और गूदे को एक पात्र में लीजिए।

प्राचीन काल में; यहाँ तक आज भी भरतीय ग्रामीन क्षेत्रों में स्त्रीयाँ कैरी को कोयले के चूले में जलाकर बनाती हैं। माना जाता है की वह सब से बेह्तरीन आम पन्न होता है। कोयले के द्वारा आने वाला धुँए का गंध उसके स्वाद में चार चाँद लगा देता है।


चरण २: कैरी के गुदे को अच्छे से गूंद कर उस में दो ग्लास पानी, एक कटोरा शहद, १/२ चम्म्च भुना हुआ जीरा पॉउडर डाल कर अच्छे से मिलाइए। वास्त्व में डा. राजु जीरे के प्रयोग को प्रोत्साहन नही देते हैं क्यों की वह मसाले की श्रेणी में आता हैं और आप जानते ही हैं की डॉ. मन्तेना की रसोई में मसाले का उपयोग नही होता। परन्तु कभि कबार समय अनुसार इस का प्रयोग करने में नश्ट नही है। क्यों की जीरा शरीर को ठंडा रखता है, हमने इसका प्रयोग यहाँ किया।


चरण ३: अंत में उसे कटा हुआ धनिया और कटा हुआ पुदीने से सजाइए और परोसें।

 

लोग अकसर बर्फ़ और फ़्रिज के पानी का प्रयोग करते हैं परन्तु मैं मिट्टी के घडे का पानी प्रयोग करना पसंद करता हूँ जो हानीरहित और आरोग्यमय रहता हैं।

फ़लों का राजा ’आम’ अपनी युवावस्था में है और बाजार में ह्रुड्दंग मचा रहा है। तो देर किस बात की है? जैसे ही बाजार में कैरी दिखे, घर ले आइए और इस अद्भुत, पौश्टिक, गूदेदार, ठंडे रस को बनाइए और इस ग्रीष्म ऋतु के गर्मी को भगाइए।

आशा करता हूँ के आप को यह अप्डेट पसंद आया होगा!। आगे और अप्डेट्स के लिए बने रहिए।

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